होलिका दहन हिंदू धर्म का एक सबसे ख़ास और पवित्र पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रमाण माना जाता है। यह त्योहार होली से एक दिन पहले मनाया जाता है। साल 2026 में होलिका दहन का त्यौहार विशेष शुभ संयोग लेकर आ रहा है।
होलिका दहन 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
तिथि: 2 मार्च 2026 (सोमवार)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 मार्च 2026 को रात लगभग 9:45 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 मार्च 2026 को रात लगभग 11:30 बजे
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त: शाम 6:30 बजे से रात 8:45 बजे तक
ध्यान दें: होलिका दहन हमेशा भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही किया जाता है। भद्रा में होलिका दहन करना अशुभ माना जाता है
होलिका दहन का धार्मिक महत्व
होलिका दहन की कथा का संबंध प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु से जुड़ा है। कथा के अनुसार, हिरण्यकशिपु एक अहंकारी राजा था जो स्वयं को भगवान मानता था, जबकि उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। राजा ने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए। अंत में उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका अग्नि में जल गई।यही घटना बुराई के अंत और सत्य की विजय का प्रतीक बन गई।
होलिका दहन की पूजा विधि
होलिका दहन की पूजा बहुत ही सरल होती है। आप निम्नलिखित विधि से पूजा कर सकते हैं:
शाम को शुभ मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
होलिका स्थल पर जल, रोली, अक्षत, फूल, गुड़ और नारियल लेकर जाएं।
होलिका की परिक्रमा करें (आमतौर पर 3 या 7 बार)।
परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करें।
अग्नि में गेहूं की बालियां या चने भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करें।
होलिका दहन के बाद क्या करें?
होलिका की राख को शुभ माना जाता है। अगले दिन इस राख का तिलक लगाने की परंपरा होती है। यह माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।इसके अगले दिन रंगों की होली खेली जाती है।

