विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: प्रमुख प्रावधान और महत्वपूर्ण बिंदु
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 उन संस्थाओं के लिए नया ढांचा प्रस्तावित करता है जिनका FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, वे स्वयं इसे छोड़ देती हैं, या उनका नवीनीकरण नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में संस्था द्वारा विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों और शेष विदेशी अंशदान के प्रबंधन, निगरानी और निपटान की व्यवस्था की गई है।
विधेयक के अनुसार, यदि किसी संस्था का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाता है, तो उसकी विदेशी फंड से निर्मित संपत्तियां एक नामित प्राधिकरण (Designated Authority) के नियंत्रण में चली जाएंगी। यह प्राधिकरण इन संपत्तियों का प्रबंधन करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उनका हस्तांतरण या निपटान भी कर सकेगा। यदि संपत्ति किसी धार्मिक स्थल से जुड़ी है, तो उसके धार्मिक स्वरूप को बनाए रखना अनिवार्य होगा।
प्रमुख प्रावधान
- FCRA प्रमाणपत्र अब केवल रद्द या समर्पित होने पर ही नहीं, बल्कि समय पर नवीनीकरण न होने या नवीनीकरण आवेदन अस्वीकृत होने पर भी समाप्त माना जाएगा।
- विदेशी अंशदान से पूरी या आंशिक रूप से बनाई गई संपत्तियां नामित प्राधिकरण में निहित होंगी।
- यदि संस्था को बाद में नया पंजीकरण या नवीनीकरण मिल जाता है, तो अप्रयुक्त धन और संपत्तियां वापस की जा सकती हैं।
- स्थायी रूप से निहित संपत्तियों का उपयोग सार्वजनिक हित के कार्यों में किया जाएगा।
- बिना FCRA पंजीकरण वाली संस्थाओं को प्राप्त विदेशी फंड निर्धारित समयसीमा के भीतर उपयोग करना होगा।
- संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियों को नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार माना जाएगा, जब तक वे अपनी ओर से उचित सावधानी साबित न कर दें।
- विधेयक में अधिकतम सजा को पांच वर्ष से घटाकर एक वर्ष करने का प्रस्ताव है।
प्रमुख चिंताएं
इस विधेयक को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी उठे हैं। यदि कोई संस्था केवल FCRA नवीनीकरण नहीं कराती, तब भी उसकी विदेशी फंड से बनी संपत्तियां प्राधिकरण के अधीन जा सकती हैं। इससे संस्थाओं के लिए FCRA व्यवस्था से बाहर निकलना कठिन हो सकता है। इसके अलावा, नवीनीकरण आवेदन खारिज होने की स्थिति में अपील या सुनवाई की स्पष्ट व्यवस्था भी प्रस्तावित नहीं की गई है।
कुल मिलाकर, यह विधेयक विदेशी अंशदान और उससे निर्मित संपत्तियों पर सरकारी निगरानी को मजबूत करने का प्रयास करता है, लेकिन इससे संस्थाओं की संपत्ति संबंधी स्वतंत्रता और अधिकारों को लेकर नई बहस भी शुरू हो सकती है।


