मोहम्मद यूनुस: बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव
Nobel Peace Prize विजेता और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह खबर दक्षिण एशिया की राजनीति में काफी चर्चा में है और सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड कर रही है।
यूनुस को अगस्त 2024 में Chief Adviser बनाया गया था, जब देश में बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। उनका काम था देश में चुनाव कराना और राजनीतिक हालात को स्थिर करना।
🇧🇩 अब आगे क्या?
16 फरवरी 2026 को यूनुस ने घोषणा की कि वह पद छोड़ रहे हैं और चुनी हुई नई सरकार को सत्ता सौंपी जाएगी। अब बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party) के नेता तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अपने विदाई संदेश में यूनुस ने कहा कि उनका लक्ष्य लोकतंत्र को मजबूत करना था और अब देश को आगे बढ़ना चाहिए। कई लोगों के लिए यह बदलाव राजनीतिक स्थिरता की ओर एक कदम माना जा रहा है।
📉 उनके कार्यकाल की चुनौतियाँ
हालाँकि यूनुस का कार्यकाल आसान नहीं रहा। उनके समय में बेरोज़गारी, महंगाई और आर्थिक दबाव जैसी समस्याएँ सामने आईं। कुछ आलोचकों का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में देरी और राजनीतिक तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
फिर भी, उनके समर्थक कहते हैं कि संक्रमण काल (transition period) में हालात संभालना आसान नहीं होता।
🪙 अंतरिम सरकार का अंत
सरकारी नोटिफिकेशन के साथ उनकी अंतरिम सरकार आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई है। अब नई कैबिनेट के साथ देश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। तारिक रहमान ने भी नीतियों और योजनाओं पर काम शुरू कर दिया है।
📊 आगे क्या होगा?
इस बदलाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या नई सरकार देश में स्थिरता और आर्थिक सुधार ला पाएगी? भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी कुछ सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं, जैसे वीज़ा सेवाओं की बहाली।
एक बात साफ है: मोहम्मद यूनुस का इस्तीफा बांग्लादेश की राजनीति में एक अहम मोड़ है। आने वाले महीनों में इसका असर और साफ दिखाई देगा।

