125 रन पर आधी टीम आउट, फिर रिंकू सिंह बने संकटमोचक; सेंट्रल जोन को पहुंचाया 266 रन तक

रिंकू सिंह ने बचाई सेंट्रल जोन की लाज, 125 रन पर 5 विकेट गिरने के बाद जड़ा शानदार अर्धशतक

रिंकू सिंह ने संभाली डूबती पारी, 125 रन पर 5 विकेट गिरने के बाद सेंट्रल जोन को पहुंचाया 266 तक

दलीप ट्रॉफी के पहले सेमीफाइनल में सेंट्रल जोन की शुरुआत बेहद खराब रही। ईस्ट जोन के तेज गेंदबाजों ने नई गेंद से ऐसा दबाव बनाया कि सेंट्रल जोन ने 125 रन के भीतर ही अपने पांच प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। ऐसे समय में जब टीम बड़े संकट में नजर आ रही थी, रिंकू सिंह ने जिम्मेदारी संभाली और अपनी संघर्षपूर्ण अर्धशतकीय पारी के जरिए टीम को सम्मानजनक स्थिति तक पहुंचाया।

टॉस जीतकर ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया। गेंदबाजों ने शुरुआती परिस्थितियों का भरपूर फायदा उठाया और सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। मुकेश कुमार, अभिजीत सरकार और मोहम्मद शमी की तेज गेंदबाजी के सामने शीर्ष क्रम लगातार दबाव में दिखाई दिया।

शुरुआत से ही लड़खड़ा गया सेंट्रल जोन का टॉप ऑर्डर

सेंट्रल जोन की पारी को शुरुआती झटकों से उबरने का ज्यादा अवसर नहीं मिला। अमन मोखाड़े सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कुणाल चंदेला भी 6 रन के स्कोर से आगे नहीं बढ़ सके। इसके बाद कप्तान रजत पाटीदार से बड़ी पारी की उम्मीद थी, लेकिन वह 12 रन बनाकर अपना विकेट गंवा बैठे।

दूसरे छोर पर आर्यन जुयाल ने अपेक्षाकृत धैर्य के साथ बल्लेबाजी की। उन्होंने 46 रन बनाकर पारी को कुछ हद तक स्थिर रखने की कोशिश की, लेकिन उनके आउट होते ही सेंट्रल जोन की मुश्किलें और बढ़ गईं। 45वें ओवर तक टीम का स्कोर 125 रन था और उसके पांच बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे।

यहीं से मैच में रिंकू सिंह की भूमिका अहम हो गई।

संकट के समय रिंकू ने दिखाई बल्लेबाजी की परिपक्वता

रिंकू सिंह क्रीज पर ऐसे वक्त पहुंचे जब टीम को केवल रन बनाने वाले बल्लेबाज की नहीं, बल्कि पारी को दोबारा खड़ा करने वाले खिलाड़ी की जरूरत थी। उन्होंने शुरुआत में परिस्थितियों को समझा और इसके बाद जरूरत के मुताबिक शॉट्स लगाते हुए स्कोरबोर्ड को आगे बढ़ाया।

रिंकू ने 88 गेंदों में 60 रन बनाए। उनकी पारी में 8 चौके शामिल रहे। उनका स्ट्राइक रेट 68.18 रहा, लेकिन इस पारी की अहमियत केवल आंकड़ों से नहीं आंकी जा सकती। जिस स्थिति में उन्होंने बल्लेबाजी की, वहां विकेट बचाना और साझेदारी बनाना सेंट्रल जोन के लिए सबसे महत्वपूर्ण था।

उन्होंने निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ मिलकर टीम को पूरी तरह बिखरने से बचाया।

हर्ष दुबे के साथ मिली अहम साझेदारी

रिंकू को हर्ष दुबे का अच्छा साथ मिला। दोनों ने छठे विकेट के लिए 85 गेंदों में 55 रन जोड़कर सेंट्रल जोन की पारी को नई दिशा दी। इस साझेदारी के दौरान टीम का स्कोर 180 रन के पार पहुंचा और ईस्ट जोन के गेंदबाजों पर शुरुआती दबाव कुछ कम हुआ।

हर्ष दुबे ने 27 रन बनाए। हालांकि 60वें ओवर में एमडी कौनैन कुरैशी ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया और यह महत्वपूर्ण साझेदारी टूट गई।

इसके बाद रिंकू ने सारांश जैन के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए 29 रन और जोड़े। सारांश के बल्ले से 13 रन निकले। रिंकू के आउट होने के बाद भी सेंट्रल जोन के निचले क्रम ने संघर्ष जारी रखा।

आखिरी बल्लेबाजों ने भी दिया अहम योगदान

रिंकू सिंह के पवेलियन लौटने के बाद ऐसा लगा कि सेंट्रल जोन जल्द ही सिमट जाएगा, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने ईस्ट जोन के गेंदबाजों को आसानी से मुकाबला खत्म नहीं करने दिया।

आर्यन पांडे ने 22 रन बनाए, जबकि यश ठाकुर ने तेजी से रन जुटाते हुए 26 गेंदों पर 30 रन ठोक दिए। यश की आक्रामक बल्लेबाजी ने सेंट्रल जोन के स्कोर को उस स्तर तक पहुंचाने में मदद की, जहां से टीम के पास मुकाबले में बने रहने का मौका था।

आखिरकार सेंट्रल जोन की पूरी पारी 80.1 ओवर में 266 रन पर समाप्त हुई।

मुकेश और अभिजीत ने बरपाया कहर

ईस्ट जोन की गेंदबाजी की बात करें तो मुकेश कुमार और अभिजीत सरकार सबसे प्रभावी रहे। मुकेश ने 56 रन देकर तीन विकेट हासिल किए, जबकि अभिजीत सरकार ने 38 रन खर्च करके तीन बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया।

मोहम्मद शमी को भी दो विकेट मिले और उनकी तेज गेंदबाजी ने सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों को लगातार चुनौती दी। ईस्ट जोन ने शुरुआत में जिस तरह से मुकाबले पर नियंत्रण बनाया था, उसे लंबे समय तक कायम रखा।

हालांकि, 125 रन पर आधी टीम गंवाने के बाद 266 रन तक पहुंचना सेंट्रल जोन के लिए किसी राहत से कम नहीं था। इस वापसी में रिंकू सिंह की 60 रन की पारी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रही।

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